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September 2020
संपादकीय न्यूज़

बोलने की भाषा में शालीनता होनी चाहिए !

December 27, 2019 11:02 AM

आजकल बोलचाल की भाशा को लेकर सर्वाधिक रूप से कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी विवादों में उलझतें नजर आ रहे है। सबसे पहले वे राफेल मामले में भ्रश्टाचार को लेकर विवादों के घेरे में आये जब देष के प्रधानमंत्री को देष का चौकीदार चोर है कहकर संबोधित किया , इस मामले को लेकर उन्हें सर्वोच्य न्यायालय में क्षमा याचना करनी पड़ी। इधर बोलने की भाशा को लेकर वे फिर से विवादों में उलझतें नजर आ रहे है जब से देष में बढ़ते बलात्कार के मामले को लेकर रेप इन इंडिया कह डाला। कांग्रेस की विपक्षी राजनीतिक दल भाजपा को यह बहुत बड़ा मुद्दा मिल गया जिसमें विवादों के घेरे में राहुल गांधी फिर से घिरते नजर आने लगे है। इस मामले पर कांग्रेस की ओर से जबाबी हमला भी किया गया कि देष के प्रधानमंत्री ने भी दिल्ली को रेप कैपिटल कह डाला है।
यह सत्य है कि आज देष में बलात्कार की घटनाएं तेजी से बढ़ती जा रही है। जिसपर कोई नियंत्रण नहीं। इस मामले से जुड़े अपराधियों को बड़े पैमाने पर कहीं न कहीं से सरंक्षण मिल तो रहा ही जिससे वे बचते आ रहे है। इस मामले को लेकर आवाज भी उठनी चाहिए। विरोध भी होना चाहिए। पर इस तरह की प्रक्रिया में विरोध प्रकट करते समय ओछी भाशा का प्रयोग कतई नहीं होना चाहिए। रेप इन इंडिया, या रेप कैपिटल कहना कतई देष के सम्मानीय पद पर आसीन को कतई षोभा नहीं देता। इसी तरह किसी मामले में देष के प्रधानमंत्री को चौकीदार चोर है, कहकर संबोधित करना भी बेहतर नहीं माना जा सकता। विषेश रूप से ऐसे व्यक्ति से जो किसी राजनीतिक दल के सर्वोच्य पद पर आसीन रहा हो । इस तरह की भाशा का प्रयोग कर वह अपनी प्रतिश्ठा को ही गिराता है।
राहुल गांधी एक सामान्य व्यक्ति नहीं रहे, उन्हें इस बात की समझ अच्छी तरह होनी चाहिए कि वे देष के सबसे बड़े व पुराने राजनीतिक दल के अध्यक्ष पद पर रह चुके है। जिनमें देष के भावी प्रधानमंत्री होने की संभावनाएं तलाषी जा रही हो वो व्यक्ति इस तरह की ओछी भाशा का प्रयोग करता रहे जिससे विवादों में घिरता चला जा रहा हो, न उसके भविश्य के लिये ठीक है न उस पार्टी के लिये जिसके नेतृत्व में वो संचालित हो रही हो। इस तरह की पृश्ठिभूमि आजतक पूर्व में इस राजनीतिक दल के किसी प्रमुख ने इस तरह की ओछी भाशा का प्रयोग नहीं किया है जिस तरीके से राहुल गांधी करते आ रहे है। कहीं न कहीं उनके सलाहकारों की फौज में कोई न कोई ऐसा षामिल अवष्य है जो उनके एवं उनसे जुड़े राजनीतिक दल कांग्रेस का हित नहीं चाहता। इस तरह के उभरते परिवेष को राहुल गांधी एवं कांग्रेस के षुभचितंको को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए बल्कि गंभीरता से विचार कर वास्तविकता को तलाषना चाहिए जिससे इस तरह का परिवेष न उभरे ।
राजनीतिक क्षेत्र में उतार चढ़ाव तो आते ही रहते है पर राजनीतिक दल के सर्वोच्य पद पर आसीन को इस तरह की ओछी राजनीति नहीं करनी चाहिए जिससे उसकी s प्रतिश्ठा पर आंच आये। विरोध जताना लोकतंत्र का जागरूक पहलू है। सत्ता पक्ष की नकामी को उजागर करना विपक्ष का दायित्व है। समाज में उभरते अपराधिक परिवेष की निंदा करना एवं उसपर विरोध जताना उसका कर्तव्य है। पर इस तरह के परिवेष में विरोध की बोलने की भाशा में षालीनता होनी चाहिए। ओछी भाशा हमेषा विवादों के घेरे में होती है। जिसे कुषल राजनीति नहीं माना जा सकता । इतिहास गवाह है जिसने भी बोलने में ओछी भाशा का प्रयोग किया है उसका पतन ही हुआ है।

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